हमें स्वार्थी नहीं, देश के प्रति निष्ठावान बनना चाहिए: श्री माधवेंद्र सिंह

हमें स्वार्थी नहीं, देश के प्रति निष्ठावान बनना चाहिए: श्री माधवेंद्र सिंह
हमें स्वार्थी नहीं, देश के प्रति निष्ठावान बनना चाहिए: श्री माधवेंद्र सिंह
हमें स्वार्थी नहीं, देश के प्रति निष्ठावान बनना चाहिए: श्री माधवेंद्र सिंह
हमें स्वार्थी नहीं, देश के प्रति निष्ठावान बनना चाहिए: श्री माधवेंद्र सिंह
हमें स्वार्थी नहीं, देश के प्रति निष्ठावान बनना चाहिए: श्री माधवेंद्र सिंह
हमें स्वार्थी नहीं, देश के प्रति निष्ठावान बनना चाहिए: श्री माधवेंद्र सिंह
हमें स्वार्थी नहीं, देश के प्रति निष्ठावान बनना चाहिए: श्री माधवेंद्र सिंह
हमें स्वार्थी नहीं, देश के प्रति निष्ठावान बनना चाहिए: श्री माधवेंद्र सिंह
हमें स्वार्थी नहीं, देश के प्रति निष्ठावान बनना चाहिए: श्री माधवेंद्र सिंह
हमें स्वार्थी नहीं, देश के प्रति निष्ठावान बनना चाहिए: श्री माधवेंद्र सिंह
  • सफल होने के लिए शिक्षा से ज्यादा जरूरी दीक्षा: ले. जनरल दुष्यंत सिंह
  • हम अपने बौद्विक विचारों से देश को फिर बना सकते हैं विश्वगुरु: ले. जनरल दुष्यंत सिंह
  • हमारी संस्कृति हमेशा राष्ट्रहित सर्वोपरि की रही है: सर्वेश कुमार द्विवेदी
  • हमारे इतिहास को गलत तरीके से पेश किया गया: डॉ. अनंत प्रकाश श्रीवास्तव 
लखनऊ । हम आजादी के 75वें वर्ष को आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य देश के लिए संघर्ष करने वाले उन क्रांतिकरियों के जीवन से परिचित कराना है, जिन्हें हम भूल गए है। इसके साथ ही हमारी आजादी कैसे अक्षुण्य रहे और इसके लिए हमारी युवा पीढ़ी की क्या भूमिका होगी, इससे अवगत कराना है। हमें स्वयं को आर्थिक दृष्टि से स्वार्थवान न बनाकर देश के विकास के लिए निष्ठावान बनाना है, जिससे हमारे देश को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान मिले। उक्त उद्गार एकल अभियान के अखिल भारतीय महामंत्री श्री माधवेन्द्र सिंह जी ने आज़ादी के अमृत महोत्सव पर आयोजित राष्ट्रहित सर्वोपरि कार्यक्रम के छठे अंक में व्यक्त किए। यह कार्यक्रम सरस्वती कुंज, निराला नगर के प्रो. राजेन्द्र सिंह (रज्जू भैया) उच्च तकनीकी (डिजिटल) सूचना संवाद केन्द्र में विद्या भारती, एकल अभियान, इतिहास संकलन समिति अवध, पूर्व सैनिक सेवा परिषद एवं विश्व संवाद केन्द्र अवध के संयुक्त अभियान में चल रहा है। 

मुख्य अतिथि लेफ्टिनेंट जनरल दुष्यंत सिंह (अति विशिष्ट सेवा मेडल, परम विशिष्ट सेवा मेडल) ने कहा कि शिक्षा जीवन में सफल बनना सिखाती  है और रास्ता भी बनाती है, लेकिन इससे जरूरी होती है दीक्षा, जो हमें बड़ों से मिलती है। इसके लिए आपके अंदर जिज्ञासा होनी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमेशा सच को जानने की कोशिश करना चाहिए। अपनी एक दिशा निश्चित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सेना में सेवा में लिए जूनून, शिक्षा और साहस होना बहुत ही जरूरी है। इसके साथ ही अपने अंदर लीडरशिप क्वालिटी होनी चाहिए, जो हमें अपने लक्ष्य तक पहुंचने का रास्ता दिखाती है। कोई भी व्यक्ति देश का कायाकल्प पलट सकता है, सिर्फ उसके अंदर जूनून होना चाहिए। हमारे देश की अपनी परम्परा रही है, हम उसे भूलते जा रहे हैं। हम अपने बौद्धिक विचारों और परम्परा के माध्यम से एक बार फिर विश्वगुरु बन सकते हैं। 

एकल अभियान के अखिल भारतीय महामंत्री श्री माधवेन्द्र सिंह जी ने कार्यक्रम की प्रस्ताविकी प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि किसी के भी जीवन में आज़ादी के अमृत महोत्सव का विशेष महत्व रहता है। इसका मतलब किसी व्यक्ति द्वारा अपने जीवन के सभी संघर्षों को पार करते हुए 75 वर्षों को पूरा कर लेना। किसी व्यक्ति के प्रकार ही देश को भी अनेक संघर्षों को पार करने के पश्चात ही विकास की ओर आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। इसके साथ ही उन्होंने देश भर में सुदूर और दुर्गम स्थानों पर शिक्षा की अलख जगाने के लिए एकल अभियान द्वारा जो कार्य किया जा रहा है, उसके बारे में विस्तार से चर्चा भी की।

कार्यक्रम अध्यक्ष राष्ट्रधर्म के निदेशक श्री सर्वेश कुमार द्विवेदी ने छात्र-छात्राओं को पत्रकारिता और संवाद के बारे में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि हमें अपने देश प्रति के कर्तव्यों को समझते हुए समाज और शासन के बीच सही संवाद स्थापित करना चाहिए और संविधान के दायरे में रहकर कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति राष्ट्रहित सर्वोपरि की रही है। हम एक राज्य व देश के हित के बारे में नहीं सोचते, बल्कि हम पूरे विश्व के कल्याण के लिए सोचते हैं। 

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि केजीएमयू के बाल चिकित्सा हड्डी रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अजय सिंह ने कहा कि कोरोना एक ऐसी बीमारी थी, जिसके बारे में किसी को कुछ नहीं पता था कि इसका इलाज क्या है, लेकिन हमारे वैज्ञानिकों ने इससे निपटने के लिए कार्य किया। उन्होंने कहा कि हमारे सैनिक जिस प्रकार से सीमा पर रहकर देश की रक्षा करते हैं, वैसे ही हम सभी को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए सहयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी को अपने-अपने दायित्व को ठीक प्रकार निभाना चाहिए। हमें भी कोरोना के सभी प्रोटोकाल का पालन करना चाहिए।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना अवध प्रांत के कार्यालय प्रमुख डॉ. अनंत प्रकाश श्रीवास्तव जी ने बावन इमली और काकोरी की घटना का जिक्र करते हुए इतिहास को तोड़-मरोड़ के पेश किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि इतिहास में स्वतंत्रता संग्राम की कई घटनाओं की सच्चाई को नहीं बताया गया, हालांकि इतिहास संकलन योजना ने फिर से उन घटनाओं को उजागर करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि इतिहास को गलत तरीके से तोड़-मरोड़ कर पेश किया जाना, किसी भी देश को काफी हद तक नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में भावी पीढ़ी की ज़िम्मेदारी बनती है कि वह सच को जाने और उसे लोगों तक पहुंचाए।

कार्यक्रम में आए अतिथियों का परिचय ने बालिका शिक्षा उमाशंकर मिश्र जी ने कराया और आभार ज्ञापन श्री राजेन्द्र बाबू, प्रदेश निरीक्षक, अवध प्रांत ने किया। कार्यक्रम का संचालन विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रचार प्रमुख श्री सौरभ मिश्रा जी ने किया। इस कार्यक्रम में लेफ्टिनेंट जनरल दुष्यंत सिंह जी की पत्नी श्रीमती उषा सिंह, पुत्रवधु आयुती सिंह और उनके पौत्र दिनेन्द्र व देवेन्द्र सिंह, सरिता जी, कार्यक्रम संयोजक डॉ. मुकेश जी, बीबीडी और बीबीएयू के छात्र-छात्राएं सहित कई लोग मौजूद रहे।