​सारे समाज को एकता के सूत्र में पिरोना ही संघ कार्य: मनमोहन वैद्य

​सारे समाज को एकता के सूत्र में पिरोना ही संघ कार्य: मनमोहन वैद्य
रांची। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. मनमोहन वैद्य ने कहा कि सारे समाज को एकता के सूत्र में पिरोना ही संघ का कार्य है। उन्होंने कहा कि संघ और उसके सभी आनुषंगिक संगठनों के कार्य भले ही अलग-अलग हों, लेकिन उसका उद्देश्य भी समाज को संगठित करना ही है। 

डॉ. वैद्य ने अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले आनुषंगिक संगठनों का कार्य प्रारंभ हुआ, जहां से अच्छे कार्यकर्ता तैयार हुए। हम सबका विचार एक है और हम भारत का भविष्य गढ़ने का दृष्टिकोण रखते हैं। धीरे-धीरे आनुषंगिक संगठनों का कार्य बढ़ता चला गया और पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए स्वदेशी के प्रचार के लिए कार्य प्रारंभ हुआ। मीडिया के माध्यम से संघ के कार्यों का प्रचार-प्रसार प्रारंभ हुआ और संघ के स्वयंसेवकों ने सक्रिय रहते हुए प्रत्यक्ष परिवर्तन की शुरुआत की।

डॉ. वैद्य ने कहा कि शिक्षक समाज का वाहक होता है, उससे विद्यार्थियों के साथ अभिभावक भी जुड़े होते हैं। शिक्षक सामाजिक परिवर्तन का भी वाहक होता है इसलिए शैक्षिक महासंघ को अपने सांगठनिक दैनंदिन गतिविधियों के साथ ही पर्यावरण संरक्षण, कुटुम्ब प्रबोधन, गौ संरक्षण, भूमि सुपोषण एवं जल संरक्षण, वृक्षारोपण, प्लास्टिक के कम से कम उपयोग, आर्गेनिक फार्मिंग आदि विभिन्न कार्यों पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। इन सब कार्यों से संगठन को निश्चित रूप से गति मिल सकेगी। 

उन्होंने कहा कि कोरोना काल में बच्चों की शिक्षा पर बहुत ही प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। आनलाइन शिक्षण विकल्प नहीं है, इससे केवल सूचनाओं का ही संप्रेषण हो पा रहा है। अभी भी कोरोना की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए स्कूल खुलने की संभावना नहीं दिखती। ऐसी स्थिति में सभी को वैक्सीन मिले। आंशिक रूप से ही सही हम उस कमी को दूर करने का प्रयास करें और अपने कार्यकर्ताओं एवं समाज के लोगों के माध्यम से अपने आसपास के 10-12 बच्चों को प्रत्यक्ष एकत्र कर उन्हें विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से जीवन कौशल एवं संस्कारों की शिक्षा देने का प्रयास करें। इस कार्य में हम 10वीं, 12वीं या उच्च कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों का भी सहयोग ले सकते हैं। ये बच्चे छठी, सातवीं, आठवीं को पढ़ा सकते हैं। इससे इनका ज्ञान भी बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि इस महामारी में जो बच्चे अनाथ हो गए या उनके परिवार में कोई कमाने वाला नहीं बचा, उनकी भी जानकारी एकत्र कर उन्हें मदद पहुंचाने का प्रयास हो। 

बैठक में शैक्षिक महासंघ के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष डॉ. प्रदीप सिंह ने प्रदेश में शिक्षकों के प्रमोशन का मुद्दा उठाया। बैठक के प्रथम सत्र में महासंघ के महामंत्री शिवानन्द सिंदनकेरा ने पिछले बैठक की कार्यवाही की जानकारी दी और ‌कोषाध्यक्ष संजय कुमार राउत ने आय-व्यय का ब्यौरा प्रस्तुत किया। बैठक का संचालन महामंत्री शिवानन्द सिंदनकेरा ने किया। बैठक में देशभर से 155 सदस्यों की उपस्थिति रही।