​नारी उत्थान को समर्पित थी दुर्गाबाई देशमुख जी : अजीत त्रिपाठी

​नारी उत्थान को समर्पित थी दुर्गाबाई देशमुख जी : अजीत त्रिपाठी
सोनभद्र। सरस्वती शिशु मंदिर ककरी में विद्यालय के वंदना सभा में दुर्गाबाई देशमुख की जयंती मनाई गई जिसमें विद्यालय के आचार्य श्री अजीत त्रिपाठी जी ने दुर्गाबाई देशमुख के बारे में बताया उन्होंने कहा। दुर्गाबाई देशमुख आंध्र प्रदेश से स्वाधीनता समर में सर्वप्रथम कूदने वाली महिला दुर्गाबाई का जन्म 15 जुलाई, 1909 को राजमुंदरी जिले के काकीनाडा नामक स्थान पर हुआ था। इनकी माता श्रीमती कृष्णवेनम्मा तथा पिता श्री रामाराव थे। पिताजी का देहांत तो जल्दी ही हो गया था; पर माता जी की कांग्रेस में सक्रियता से दुर्गाबाई के मन पर बचपन से ही देशप्रेम एवं समाजसेवा के संस्कार पड़े। उन दिनों गांधी जी के आग्रह के कारण दक्षिण भारत में हिन्दी का प्रचार हो रहा था। दुर्गाबाई ने पड़ोस के एक अध्यापक से हिन्दी सीखकर महिलाओं के लिए एक पाठशाला खोल दी। इसमें उनकी मां भी पढ़ने आती थीं। इससे लगभग 500 महिलाओं ने हिन्दी सीखी। इसे देखकर गांधी जी ने दुर्गाबाई को स्वर्ण पदक दिया। गांधी जी के सामने दुर्गाबाई ने विदेशी वस्त्रों की होली भी जलाई। इसके बाद वे अपनी मां के साथ खादी के प्रचार में जुट गयीं।