​1857 की क्रांति के अग्रदूत थे मंगल पांडे जी : बांके बिहारी पांडे

​1857 की क्रांति के अग्रदूत थे मंगल पांडे जी : बांके बिहारी पांडे
प्रयागराज। रानी रेवती देवी सरस्वती विद्या निकेतन इंटर कॉलेज, राजापुर, प्रयागराज के संगीताचार्य एवं मीडिया प्रभारी मनोज गुप्ता की सूचनानुसार विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री बांके बिहारी पांडे जी ने महान लेखिका मलयालम भाषा की प्रसिद्ध कवित्री साहित्य अकादमी एवं पद्म भूषण से सम्मानित नालापत बालमणि अम्मा जी एवं प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम 1857 की क्रांति के अग्रदूत, मां भारती के वीर सपूत, अमर बलिदानी मंगल पांडे जी सहित दोनों महान लोगों की जयंती पर विद्यालय परिवार सहित शत-शत नमन किया।

उन्होंने मंगल पांडे जी के बारे में बताते हुए कहा कि मंगल पाण्डेय का जन्म भारत में उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नगवा नामक गांव में १९ जुलाई १८२७ को एक "ब्राह्मण" परिवार में हुआ था। हांलाकि कुछ इतिहासकार इनका जन्म-स्थान फैज़ाबाद के गांव सुरहुरपुर को मानते हैं। इनके पिता का नाम दिवाकर पांडे था। 

"ब्राह्मण" होने के बाद भी मंगल पाण्डेय सन् 1849 में 22 साल की उम्र में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में शामिल हो गए। भारत के स्वाधीनता संग्राम में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को लेकर भारत सरकार द्वारा उनके सम्मान में सन् 1984 में एक डाक टिकट जारी किया गया। तथा मंगल पांडे द्वारा गाय की चर्बी मिले कारतूस को मुँह से काटने से मना कर दिया था,फलस्वरूप उन्हे गिरफ्तार कर 8 अप्रैल 1857 को फांसी दे दी गई।

शत शत नमन करने वालों में रमेश चंद्र मिश्रा ,जटाशंकर तिवारी, शिव नारायण सिंह, कामाख्या प्रसाद दुबे ,आनंद कुमार, अशोक कुमार मौर्य, दिनेश कुमार शुक्ला, सत्य प्रकाश पांडे प्रथम ,अवधेश कुमार, वकील प्रसाद, वाचस्पति चौबे, सुनील कुमार, शशी कपूर गुप्ता ,प्रेम सागर मिश्रा ,प्रभात कुमार शर्मा ,मनोज कुमार गुप्ता ,दीपक दयाल ,रमेश चंद्र अग्रहरि, मान सिंह यादव ,सत्य प्रकाश पांडे द्वितीय,अनूप सिंह विनय कुमार यादव ,वंशराज यादव ,विमल चंद दुबे एवं विभु श्रीवास्तव सहित पूरा विद्यालय परिवार शामिल रहा l