ओम नमः शिवाय मंत्र के जाप से सभी जीवों का होता है कल्याण : मा. संजय जी

ओम नमः शिवाय मंत्र के जाप से सभी जीवों का होता है कल्याण : मा. संजय जी
लखनऊ, सोमवार, 20 सितंबर, 2021

ओम नमः शिवाय मंत्र बोलने में जितना सरल लगता है उतना ही अधिक इसका प्रभाव है। जीव का कल्याण कैसे हो, इस दृष्टि से यह मंत्र अत्यंत उपयोगी है। भगवान के कई रूप हैं उन्हें कई नामों से जाना जाता है, जिसमें शिव नाम का अर्थ कल्याण है जो जीवों के कल्याण के लिए हैं। उक्त बातें माननीय संजय जी, अखिल भारतीय सह संगठन मंत्री इतिहास संकलन योजना ने प्रो. रज्जू भैया सूचना संवाद केंद्र में शतघंटात्मकं शिव पञ्चाक्षर मन्त्र के पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित परिचर्चा में कही। बता दें कि कोरोना महामारी के संकट भरे समय में सम्पूर्ण विश्व की रक्षा हेतु और जन सामान्य में नकारात्मकता का नाश कर भक्ति भाव जाग्रत करने के उद्देश्य से प्रो. रज्जू भैया सूचना संवाद केंद्र से शतघंटात्मकं शिव पञ्चाक्षर मन्त्र का शुभारम्भ 16 सितम्बर 2021 को  प्रात: 10:15 किया गया। इस कार्यक्रम में विद्या भारती के शिक्षक, बच्चे और उनके अभिभावक सहित लाखों लोग आनलाइन जुड़े थे। 

कार्यक्रम अध्यक्ष माननीय संजय ने कहा कि इस मंत्र में ओम शब्द की व्याप्ति है। सृष्टि की उत्पति के बाद सबसे पहले शब्द ओम की उत्पति हुई है और इस ओम शब्द का नाद ब्रह्मांड में निरंतर हो रहा है। यही ओम शब्द ही ब्रह्म है। ऐसे में जब हम ओम का जाप करते हैं तो स्वयं को ब्रह्मांड से जोड़ लेते हैं। सांसारिक बंधनों से मुक्ति और ब्रह्म से स्वयं को जोड़ने के लिए ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करते हैं। साथ ही उन्होंने हिन्दू धर्म के 12 ज्योतिर्लिंग, 51 शक्ति पीठ, 4 धामों व 11 गणपतय के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। 

विशिष्ट वक्ता श्री अशोक सिन्हा प्रमुख, विश्व संवाद केंद्र अवध प्रांत ने कहा कि ओम नमः शिवाय मंत्र का अर्थ है भगवान शिव से प्रार्थना करना, उनकी आराधना करना। पाँच शब्दों से मिलकर बना यह मंत्र पञ्चाक्षर कहलाता है। इसमें बहुत बड़ा वैज्ञानिक गुण तत्व छुपा हुआ है। यह मंत्र ब्रह्मांड के सभी तत्वों का संक्षेप में वर्णन करता है। यह ब्रह्मांड के पंच तत्वों का प्रतिनिधित्व भी करता है। उन्होंने कहा कि अन्तरिक्ष यात्रियों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि अन्तरिक्ष में जो तरंगे प्रवाहित होती हैं उनमें ओम शब्द का उच्चारण सुनाई पड़ता है। ओम शब्द का उच्चारण एक प्रकार साउंड थेरेपी है जिससे हमारे शरीर के तत्वों का शुद्धिकरण होता है। उन्होंने कहा कि धर्म एकमात्र पूजन पद्धति नहीं बल्कि यह संबंध सीधे विज्ञान से है और ओम नमः शिवाय मंत्र के जाप से हम ब्रह्मांड के रहस्यों को जान सकते हैं। परमब्रह्म के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि जो हमारे शरीर में वही पूरे ब्रह्मांड में है। ऐसे में हमें ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने के लिए स्वयं समझना पड़ेगा। यदि सुख की प्राप्ति करना चाहते हैं तो वह हमारे भीतर ही है। हम जैसा स्वयं को देखेंगे वैसी ही सृष्टि दिखेंगी। 

श्री जय प्रकाश उपाध्याय जी, क्षेत्र व्यवस्था प्रमुख राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पूर्वी उ. प्र. ने कहा कि पृथ्वी पर वास करने वाले सभी जीव-जंतुओं के लिए ओम नमः शिवाय कल्याणकारी मंत्र है। इसके जाप से हम अपने साथ-साथ अन्य जीवों का भी कल्याण करते हैं। उन्होंने कहा कि पृथ्वी पर जन, जंगल, जमीन, जन्तु एवं जल यदि सुरक्षित रहेंगे तो यह संसार ठीक प्रकार चलता रहेगा। जिनके कल्याण के लिए ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करते हैं। भगवान शिव के नाम मात्र के जाप से मोक्ष की प्राप्ति होती है।  

श्री राजेंद्र बाबू प्रदेश निरीक्षक अवध प्रांत ने कहा कि ओम नमः शिवाय का जाप शक्ति प्रदान करने वाला है। संसार के समस्त जीव में ईश्वर का अंश है और जब कोई बालक विद्यालय जाता है तो एक गुरु उस बालक के रूप में ईश्वर को देखता है। उन्होंने कहा कि गुरु का प्रयास होता है कि वह बालक का इस प्रकार सर्वांगीण विकास करे की वह धर्म की स्थापना में सक्षम हो। उन्होंने कहा कि भगवान शिव जिन्हें भोलेनाथ के नाम से जाना जाता है, जो वास्तव में भोले हैं जिनके सिर्फ जाप मात्र से आपके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।

कार्यक्रम का संचालन विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रचार प्रमुख श्री सौरभ मिश्रा जी ने किया। इस कार्यक्रम में बालिका शिक्षा प्रमुख श्री उमाशंकर जी, सह प्रचार प्रमुख श्री भास्कर दूबे, श्री रजनीश वर्मा, सुश्री शुभम सिंह, श्री अतहर रजा, श्री शोभित जी, श्री अभिषेक जी सहित डिजिटल टीम के कर्मचारी मौजूद रहे।