लखीमपुर : सनातन धर्म स.शि.म. मिश्राना में मनाई गई हिंदी साहित्य के समीक्षक क्षितिज मोहन सेन जी की पुण्यतिथि

लखीमपुर : सनातन धर्म स.शि.म. मिश्राना में मनाई गई हिंदी साहित्य के समीक्षक क्षितिज मोहन सेन जी की पुण्यतिथि
लखीमपुर। विद्या भारती विद्यालय सनातन धर्म सरस्वती शिशु मंदिर मिश्राना में 12 मार्च, शुक्रवार को वंदना स्थल पर प्रधानाचार्य जी ने पुष्पार्चन एवं दीपप्रज्ज्वलन कर हिंदी साहित्य के समीक्षक क्षितिज मोहन सेन जी की पुण्यतिथि मनाई। इस मौके पर मीडिया प्रभारी महोदय जी ने भैया / बहिन को सम्बोधित करते हुये बताया कि क्षितिज मोहन सेन जी का मध्यकालीन संत साहित्य के मर्मज्ञ समीक्षकों में अग्रणी स्थान है। क्षितिज मोहन सेन जी की गिनती अपने समय के प्रमुख संस्कृत विद्वानों में की जाती थी। ये अमर्त्य सेन (भारत रत्न एवं नोबेल पुरुस्कार से सम्मानित) के नाना थे। अपने नाना के प्रभाव से ही अमर्त्य सेन ने संस्कृत सीखी थी और भाषायी विद्वत्ता हासिल की क्षितिजमोहन सेन का जन्म सन 1880 में भारत  की प्राचीन नगरी वाराणसी  में हुआ था। कवीन्द्र-रवीन्द्र के शिक्षण संस्थान ‘विश्व भारती के अंतर्गत क्षितिजमोहन सेन जी  'विद्या भवन ' के अध्यक्ष भी बने थे। मध्यकाल के संत साहित्य के मर्मज्ञ समीक्षकों में इनका अग्रणी स्थान है। बांग्ला भाषा में उत्कृष्ट लेखन के अतिरिक्त हिन्दी में भी क्षितिज मोहन सेन ने 'भारतवर्ष में जाति भेद' तथा 'संस्कृति संगम' नामक कृतियाँ रची थीं। 'विश्व भारती' से सेवा-निवृत्ति के उपरांत क्षितिजमोहन सेन वहाँ ‘कुल स्थविर’ के रूप में प्रतिष्ठित थे। इस संस्थान ने आपको 'देशिकोत्तम' की उपाधि से सम्मानित किया था। हिन्दी में भी समय-समय पर इन्हें कई बार सम्मान मिला था। 12 मार्च, सन 1960 को क्षितिजमोहन सेन जी का स्वर्गवास हो गया। इस अवसर पर विद्यालय का समस्त परिवार उपस्थित रहा।