लखीमपुर: सनातन धर्म सरस्वती शिशु मंदिर मिश्राना में स्वतंत्रता सेनानी का मनाया गया जन्म दिवस

लखीमपुर: सनातन धर्म सरस्वती शिशु मंदिर मिश्राना में स्वतंत्रता सेनानी का मनाया गया जन्म दिवस
लखीमपुर। सनातन धर्म सरस्वती शिशु मंदिर मिश्राना में स्वतंत्रता सेनानी अरुणा आसफ़ अली का जन्म दिवस मनाया गया। अरुणा आसफ अली.16 जुलाई 1909 को कालका (हरियाणा) के हिन्दू बंगाली परिवार में एक बेटी का जन्म हुआ। मृत्यु 29 जुलाई, 1996 रखा गया। अरुणा गांगुली पापा उपेन्द्रनाथ गांगुली का नैनीताल में एक होटल था। मां अम्बालिका देवी अरुणा ने तालीम नैनीताल और लाहौर में पाई ग्रेजुएशन के बाद अरुणा कोलकाता के गोखले मेमोरियल स्कूल टीचर बन गईं।  इलाहाबाद में उनकी मुलाकात आसफ अली से हुई। आसफ अली कांग्रेसी नेता थे, उम्र में उनसे 23 साल बड़े थे । ये वही आसफ अली हैं जिन्होंने आज़ादी की लड़ाई लड़ने वाले भगत सिंह का हमेशा सपोर्ट किया। असेंबली में बम फोड़ने के बाद गिरफ्तार हुए भगत सिंह का केस भी आसफ अली ने ही लड़ा था। 
1930 में नमक सत्याग्रह के दौरान अरुणा ने सार्वजनिक सभाओं को सम्बोधित किया, जुलूस निकाला। ब्रिटिश सरकार ने उन पर आवारा होने का आरोप लगाया और एक साल की कैद दी। गांधी-इर्विन समझौते के बाद सभी राजनैतिक बंदियों को रिहा किया गया, पर अरुणा को नहीं. उनके लिए जन आंदोलन हुआ और ब्रिटिश सरकार को झुकना पड़ा।  
आजादी के समय अरुणा आसफ अली सोशलिस्ट पार्टी की सदस्या थीं. सोशलिस्ट पार्टी तब तक कांग्रेस की रूपरेखा का हिस्सा रहा था। 1948 में अरुणा और समाजवादियों ने मिलकर एक सोशलिस्ट पार्टी बनाई। 1955 में यह समूह भारत की कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़ गया और वह इसकी केंद्रीय समिति की सदस्य और ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस की उपाध्यक्ष बन गईं। 
1958 में उन्होंने भारत की कम्युनिस्ट पार्टी को छोड़ दिया और दिल्ली की प्रथम मेयर चुनी गईं।  मेयर बनकर इन्होंने दिल्ली में सेहत, विकास और सफाई पर ख़ास ध्यान दिया। 1960 में उन्होंने एक मीडिया पब्लिशिंग हाउस की स्थापना की।