वाराणसी: सरस्वती शिशु मंदिर रेशम कटरा में मनाई गई रवि दास जयंती

वाराणसी: सरस्वती शिशु मंदिर रेशम कटरा में मनाई गई रवि दास जयंती
वाराणसी। श्रीमति लछना देवी सरस्वती शिशु मंदिर रेशम कटरा वाराणसी में रवि दास जयंती मनाई गई। वंदना सभा में प्रधानाचार्य दिवाकर पाण्डेय जी ने उनके जीवन पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संत रविदास जी का जन्म वाराणसी के पास के गांव में हुआ था। माना जाता है इनका जन्म लगभग सन 1450 में हुआ था। उनकी माता का नाम श्रीमति कलसा देवी और पिता का नाम श्रीसंतोख दास जी था। संत रविदास जी ने लोगों को बिना भेदभाव के आपस में प्रेम करने की शिक्षा दी।
  • एक कथा के अनुसार रविदास जी अपने साथी के साथ खेल रहे थे। एक दिन खेलने के बाद अगले दिन वो साथी नहीं आता है तो रविदास जी उसे ढूंढ़ने चले जाते हैं, लेकिन उन्हे पता चलता है कि उसकी मृत्यु हो गई।
  • ये देखकर रविदास जी बहुत दुखी होते हैं और अपने मित्र को बोलते हैं कि उठो ये समय सोने का नहीं है, मेरे साथ खेलो। इतना सुनकर उनका मृत साथी खड़ा हो जाता है।
  • ऐसा इसलिए होता है क्योंकि संत रविदास जी को बचपन से ही आलौकिक शक्तियां प्राप्त थी।
  • लेकिन जैसे-जैसे समय निकलता गया उन्होंने अपनी शक्ति भगवान राम और कृष्ण की भक्ति में लगाई। इस तरह धीरे-धीरे लोगों का भला करते हुए वो संत बन गए।