वीर-वीरांगनाओं की शौर्य गाथाओं से युवा पीढ़ी को मिलेगी प्रेरणा: श्री गजेन्द्र जी 

वीर-वीरांगनाओं की शौर्य गाथाओं से युवा पीढ़ी को मिलेगी प्रेरणा: श्री गजेन्द्र जी 
  • आजाद भारत में हम मानसिक रूप से अभी भी गुलाम: डॉ. प्रवीण कुमार राय
  • छात्रों के अंदर नेतृत्व के गुण का विकास करना होगा : कैप्टन राघवेन्द्र विक्रम सिंह

लखनऊ, गुरुवार, 31 मार्च,  2022

देश की आजादी के लिए वीर सेनानियों के साथ ही वीरांगनाओं ने भी अपने प्राणों की आहुति दी, लेकिन इतिहास का यह दुर्भाग्य रहा कि हम केवल कुछ ही वीर-वीरांगनाओं की शौर्य गाथाओं को व्यापक रूप से जनमानस में प्रचारित-प्रसारित कर पाए, न जाने कितने वीर-वीरांगनाओं की शौर्य गाथाएं आज भी इतिहास के गर्भ में दफन हैं। अमृत महोत्सव के मौके पर आवश्यकता है आजादी के उन गुमनाम नायक-नायिकाओं को स्मरण करने की, ताकि हम समझ सकें कि आजादी का वास्तविक अर्थ क्या है और किन दुर्गम परिस्थितियों में पूर्वजों ने इसे हासिल किया है। उक्त उद्गार कार्यक्रम अध्यक्ष विश्व हिन्दू परिषद के क्षेत्रीय संगठन मंत्री श्री गजेन्द्र जी ने आजादी के अमृत महोत्सव पर आयोजित राष्ट्रहित सर्वोपरि कार्यक्रम के 16वें अंक में व्यक्त किए। यह कार्यक्रम सरस्वती कुंज, निराला नगर के प्रो. राजेन्द्र सिंह (रज्जू भैया) उच्च तकनीकी (डिजिटल) सूचना संवाद केन्द्र में विद्या भारती, एकल अभियान, इतिहास संकलन समिति अवध, पूर्व सैनिक सेवा परिषद एवं विश्व संवाद केन्द्र अवध के संयुक्त अभियान में चल रहा है।

मुख्य वक्ता ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विवि के मुख्य कुलानुशासक डॉ. प्रवीण कुमार राय ने कहा कि देश की आज़ादी के लिए अनेक महापुरुषों ने बलिदान दिया है, लेकिन इतिहास में कुछ खास लोगों को ही जगह मिली है। आजादी के कई ऐसे नायक भी हैं, जिन्हें आजादी के बाद भी सम्मान नहीं मिला, जिसके वह हकदार थे। ऐसे गुमनाम नायकों के बारे में युवा पीढ़ी जान सके, इस उद्देश्य को ध्यान में रखकर आज़ादी का अमृत महोत्सव देशभर में मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आजादी के 75 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं, लेकिन मानसिक रूप से हम अभी भी गुलाम हैं। उन्होंने कहा कि क्या हम अंग्रेजी मानसिकता से भी आज़ाद हुए हैं, इस पर चिंतन करने की आवश्यकता है।  


विशिष्ट अतिथि पूर्व सैनिक सेवा परिषद के उपाध्यक्ष कैप्टन राघवेन्द्र विक्रम सिंह ने कहा कि देश के सभी विद्यालयों में एनसीसी, एनएसएस, सिविल डिफेन्स, पर्यावरण जैसी इकाईयां होनी चाहिए, जिससे छात्रों के अंदर नेतृत्व के गुण का विकास किया जा सके। उन्होंने कहा कि सेना में जाने वाले छात्रों के लिए विद्यालय स्तर पर ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे उनका मार्गदर्शन हो सके। उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि सरकार द्वारा एक ऐसे मंत्रालय का निर्माण करना चाहिए, ताकि पूर्व सैनिकों के कल्याण और सैन्य सेवाओं में जाने वाले युवाओं को प्रशिक्षित किया जा सके।

 


कार्यक्रम अध्यक्ष विश्व हिन्दू परिषद के क्षेत्रीय संगठन मंत्री श्री गजेन्द्र जी ने आत्मनिर्भर भारत का जिक्र करते हुए कहा कि हमें मेक इन इंडिया पर जोर देना चाहिए। हमें दूसरों पर आश्रित न रहकर आत्मनिर्भर बनना चाहिए। इसके लिए युवाओं को आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि युवाओं के अंदर देश के लिए अपनत्व की भावना होनी चाहिए। वह जिस भी क्षेत्र में कार्य करें, देश के लिए कुछ कर गुजरने की भावना से ओत-प्रोत हो।


मुख्य अतिथि ब्रिगेडियर अमूल्य मोहन जी ने सैन्य अनुभवों को साझा किया। उन्होंने युवाओं को सैन्य सेवाओं में जाने के लिए प्रेरित किया। अवध प्रांत के सेवा प्रमुख वरिष्ठ प्रचारक श्री रजनीश पाठक जी ने कार्यक्रम की प्रस्ताविकी रखी और अतिथियों का परिचय कराया। इतिहास संकलन समिति, अवध प्रांत की सदस्य डॉ. वंदना सिंह ने सभी अतिथियों को आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रचार प्रमुख श्री सौरभ मिश्रा जी ने किया। 


इस अवसर पर लोहिया अस्पाताल के चिकित्सक डॉ. मनीष वर्मा, सूबेदार हरीराम यादव, एकल अभियान युवा विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री दुर्गेश कुमार त्रिपाठी, कैप्टन राघवेन्द्र विक्रम सिंह, कार्यक्रम संयोजक डॉ. मुकेश वर्मा, सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, मॉडल हाउस, लखनऊ के छात्र-छात्राएं व 63वीं यू.पी. एनसीसी बटालियन लखनऊ के कैडेट सहित कई लोग मौजूद रहे।