औरैया: सरस्वती विद्या मंदिर इण्टर कॉलेज, दिबियापुर में मनाई गई पं. दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती

औरैया: सरस्वती विद्या मंदिर इण्टर कॉलेज, दिबियापुर में मनाई गई पं. दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती
औरैया: सरस्वती विद्या मंदिर इण्टर कॉलेज, दिबियापुर में मनाई गई पं. दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती

औरैया। सरस्वती विद्या मंदिर इण्टर कॉलेज, दिबियापुर में आज 24 सितम्बर को जनसंघ के संस्थापक पंडित दीनदयाल जी की जयंती मनाई गयी। वंदना सभा में  विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री सुशील कुमार तिवारी  जी नें पं. दीन दयाल जी के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। इसके पश्चात् विद्यालय के आचार्य श्री गोविंद नारायण अवस्थी  जी नें  उनके महान व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितम्बर 1916 को मथुरा जिले के "नगला चन्द्रभान" ग्राम में हुआ था। उनके पिता का नाम भगवती प्रसाद उपाध्याय तथा माता का नाम रामप्यारी था, जो धार्मिक प्रवृत्ति की थीं। पिता रेलवे में जलेसर रोड स्टेशन के सहायक स्टेशन मास्टर थे।  दीनदयाल जी की माता जी को  क्षय रोग लग गया। 8 अगस्त 1924 को उनका भी देहावसान हो गया। उस समय दीनदयाल 7 वर्ष के थे। राजस्थान से दसवीं की परीक्षा में बोर्ड में प्रथम स्थान प्राप्त किया। 

1937 में पिलानी से इंटरमीडिएट की परीक्षा में पुनः बोर्ड में प्रथम स्थान प्राप्त किया। 1939 में कानपुर के सनातन धर्म कालेज से बी०ए० की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। अंग्रेजी से एम०ए० करने के लिए सेंट जॉन्स कालेज, आगरा में प्रवेश लिया और पूर्वार्द्ध में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुये। उन्होंने बताया की उन्होंने जनसंघ की स्थापना की थी। चतुर्थ के भैया अंश गुप्ता व आर्यन पाठक ने भी उनके जीवन से सम्बंधित प्रेरक प्रसंग सुनाएं। 
प्रधानाचार्य जी नें उनके राजनीतिक जीवन के बारे में बताया कि उन्होंने अपना राजनैतिक सफर कानपुर महानगर से की, 1937 में जब वह कानपुर से बी०ए० कर थे, अपने सहपाठी बालूजी महाशब्दे की प्रेरणा से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सम्पर्क में आये। संघ के संस्थापक डॉ० हेडगेवार का सान्निध्य कानपुर में ही मिला। उपाध्याय जी ने पढ़ाई पूरी होने के बाद संघ का दो वर्षों का प्रशिक्षण पूर्ण किया और संघ के जीवनव्रती प्रचारक हो गये। आजीवन संघ के प्रचारक रहे। संघ के माध्यम से ही उपाध्याय जी राजनीति में आये। 

21 अक्टूबर 1951 को डॉ० श्यामाप्रसाद मुखर्जी की अध्यक्षता में 'भारतीय जनसंघ' की स्थापना हुई। गुरुजी (गोलवलकर जी) की प्रेरणा इसमें निहित थी। 1967 में कालीकट अधिवेशन में उपाध्याय जी भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष निर्वाचित हुए। वह मात्र कुछ दिन ही जनसंघ के अध्यक्ष रहे। 10/11 फरवरी 1968 की रात्रि में मुगलसराय स्टेशन पर उनकी हत्या कर दी गई। उनकी याद में अब मुगलसराय स्टेशन का नाम भी पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन रखा गया है और बताया की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चिंतक और संगठनकर्ता थे। वे भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने भारत की सनातन विचारधारा को युगानुकूल रूप में प्रस्तुत करते हुए देश को एकात्म मानववाद नामक विचारधारा दी। कार्यक्रम में विद्यालय के सभी भैया /बहिन व समस्त समस्त विद्यालय परिवार उपस्थित रहा।