संस्कार भारती के संरक्षक बाबा योगेन्द्र जी नहीं रहे

संस्कार भारती के संरक्षक बाबा योगेन्द्र जी नहीं रहे
संस्कार भारती के संरक्षक बाबा योगेन्द्र जी नहीं रहे

लखनऊ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं संस्कार भारती के संरक्षक पद्मश्री बाबा योगेन्द्र का शुक्रवार को निधन हो गया। वह 98 वर्ष के थे और पिछले कई दिनों से उनका लखनऊ के डॉ. राममनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में इलाज चल रहा था। उनके निधन पर सम्पूर्ण संघ परिवार और कला एवं संस्कृति से जुड़ी हस्तियों ने शोक जताया है। बाबा योगेन्द्र का पूरा जीवन लोक कला और संस्कृति के उत्थान को समर्पित रहा।

बाबा योगेन्द्र का जन्म बस्ती जिले के गांधीनगर मोहल्ले में 07 जनवरी 1924 को हुआ था। वहीं पर गौरीरत्न धर्मशाला में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा लगती थी। शाखा में लाठी चलाना अच्छी प्रकार से सिखाया जाता था। लाठी सिखाने के उद्देश्य से उनके पिता बाबू विजय बहादुर योगेन्द्र को लेकर संघ की शाखा में गये। इसके बाद वह संघ की शाखा में नियमित जाने लगे। इसके बाद बालमुकुन्द इण्टर कालेज बस्ती से हाईस्कूल करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए गोरखपुर गये। गोरखपुर में संघ के प्रचारक नानाजी देशमुख से उनकी भेंट हुई। लखनऊ के कालीचरण इण्टर कालेज से 1942 में संघ शिक्षा वर्ग प्रथम वर्ष का प्रशिक्षण किया। संघ शिक्षा वर्ग द्वितीय वर्ष वाराणसी से किया। उन्होंने संघ शिक्षा वर्घ तृतीय वर्ष 1945 में किया। इसके बाद नानाजी देशमुख की प्रेरणा से योगेन्द्र संघ के प्रचारक बने। सबसे पहले उन्हें बस्ती का तहसील प्रचारक बनाया गया। इसके बाद महराजगंज एवं पड़रौना में भी तहसील प्रचारक रहे। इसके बाद बस्ती, प्रयागराज, बहराईच, बरेली, बदायूं, हरदोई और सीतापुर में जिला प्रचारक के नाते कार्य किया। 1975 में आपातकाल के समय सीतापुर के विभाग प्रचारक रहे।

आपातकाल हटने के बाद जब संगठन का प्रत्यक्ष कार्य फिर से प्रारम्भ हुआ। वर्ष 1978 में दिल्ली में विद्या भारती द्वारा देशभर के शिशुओं का एक बड़ा कार्यक्रम रखा गया। तत्कालीन राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी और तत्कालीन सरसंघचालक बालासाहब देवरस उस कार्यक्रम में आये थे। शिशु संगम के इस कार्यक्रम में योगेन्द्र जी को साज-सज्जा का काम दिया गया था। उसमें लगायी गयी प्रदर्शनी की राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी समेत सभी लोगों ने काफी सराहना की थी। इसके बाद वर्ष 1979 में प्रयागराज में द्वितीय विश्व हिन्दू सम्मेलन हुआ। उसमें 35 देशों के कलाकार आये थे। संघ के वरिष्ठ प्रचारक एकनाथ रानाडे ने बाबा योगेन्द्र को विवेकानन्द शिला स्मारक की प्रदर्शनी बनाकर सम्मेलन में लगाने के लिए कहा।

रज्जू भैया के कहने पर कलाकारों के बीच शुरू किया काम 

प्रो. राजेंद्र सिंह उर्फ रज्जूभैया, भाऊराव देवरस और माधवराव देवड़े की इच्छा थी की कलाकारों के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का काम होना चाहिए। संघ के अधिकारियों ने योगेन्द्र से बात की और वह इस कार्य में लग गये। परिणामस्वरूप 01 जनवरी 1981 को लखनऊ में संस्कार भारती की स्थापना हुई। योगेन्द्र ने देशभर में घूम-घूम कर कलाकारों से संपर्क किया और जगह-जगह समितियां बनायीं। वर्तमान में देशभर में संस्कार भारती की कुल 1200 इकाइयां हैं। यह उनके ही कार्यों का प्रतिफल है। आज संस्कार भारती की प्रसिद्धि पूरी दुनिया में है। इससे जुड़े कलाकार कला की हर विधा में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।

लोक कलाओं के माध्यम से पूर्वोत्तर के वनवासी कलाकारों को किया संगठित

मातृभूमि के प्रति ममता को समाज में जगाने का कार्य कलाकार करते हैं। लोक कलाओं के माध्यम से वनवासी क्षेत्रों के लोगों को अध्यात्म से जोड़ने का कार्य बाबा योगेन्द्र ने किया। उन्होंने वनवासी क्षेत्रों के कलाकारों को मंच प्रदान कर एकसूत्र में पिरोने का कार्य किया।

विश्वभर में सराही गयी प्रदर्शनी

बाबा योगेन्द्र के नेतृत्व में 1857 के स्वाधीनता संग्राम की अमर गाथा और विश्व को भारत की देन विषय पर बनवायी गयी प्रदर्शनी देश ही नहीं बल्कि विश्वभर में सराही गयी थी। देश-विभाजन पर बनी प्रदर्शिनी को जिसने देखा, वह द्रवित हुआ। फिर इसके बाद तो आपातकाल, जलता कश्मीर, संकट में गोमाता और मां की पुकार प्रदर्शनी की देशभर में सराहना हुई।

नवोदित कलाकारों को मंच प्रदान किया

कलाकार किसी भी राष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान होते हैं। ‘वह’ कला के माध्यम से समाज में ‘संस्कार’ पैदा करना चाहती है। बाबा योगेन्द्र ने संस्कार भारती के माध्यम से नवोदित कलाकारों को एक मंच प्रदान कर समाज के सामने लाने का कार्य किया। सम्पूर्ण जीवन कला और संस्कृति के उत्थान में लगाया। उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर परेशानियां सहते और संघर्ष करते हुए अहर्निस कलाकारों को खोजा।

मुख्यमंत्री योगी ने निधन पर जताया शोक

पद्मश्री से सम्मानित बाबा योगेन्द्र के निधन पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ‘संस्कार भारती’ के संस्थापक, असंख्य कला साधकों के प्रेरणास्रोत, कला ऋषि, ‘पद्मश्री’ बाबा योगेंद्र जी का निधन अत्यंत दुःखद है। प्रभु श्रीराम से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्री चरणों में स्थान व उनके असंख्य प्रशंसकों को यह दुःख सहने की शक्ति दें।