भारत को अपनी माता मानने वाला हर कोई हिन्दू है : संघ प्रमुख मोहन भागवत

भारत को अपनी माता मानने वाला हर कोई हिन्दू है : संघ प्रमुख मोहन भागवत
भारत को अपनी माता मानने वाला हर कोई हिन्दू है : संघ प्रमुख मोहन भागवत

हमारे रहन-सहन, भाषा अलग हो सकती है लेकिन संकट के समय हम सब साथ खड़े होते हैं। हमारे साथ खड़े होने का उदहारण कोरोना काल है। संघ को लोकप्रियता नहीं चहिए। संघ का उद्देश्य अच्छे विचारों के साथ चरित्र का निर्माण करना भी है। भारत माता को अपनी मां और मात्रभूमि मानने वाला हर व्यक्ति हिंदू है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा भी है कि हिंदू एक जीवन पद्धति ही नहीं एक परंपरा भी है। देश को भारत को वैभवशाली, सामर्थ्यवान बनाना ही हम सभी का उद्देश्य है।  एकमात्र हिंदुत्व ही ऐसी विचारधारा है, जिसकी विविधता में एकता है।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने अंबिकापुर में बाद्धिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि  हम 1925 से कह रहे हैं कि भारत में रहने वाला हर व्यक्ति हिंदू है। जो भारत को अपनी माता मानता है, मातृभूमि मानता है, जो भारत में विविधता में एकता वाली संस्कृति को जीना चाहता है, उसके लिए प्रयास करता है, वह पूजा किसी भी तरह से करे, भाषा कोई भी बोले, खानपान, रीति-रिवाज कोई भी हो, वह​ हिंदू है। उन्होंने कहा कि एक मात्र हिंदुत्व नाम का विचार दुनिया में ऐसा है जो विविधताओं को एकजुट करने में विश्वास करता है।

भागवत ने कहा कि हिंदुत्व ने सब विविधताओं को हजारों वर्षों से भारत की भूमि में एक साथ चलाया है, यह सत्य है और इस सत्य को बोलना है और डंके की चोट पर बोलना है।उन्होंने कहा कि संघ का काम हिंदुत्व के विचार के अनुसार व्यक्ति और राष्ट्रीय चरित्र का निर्माण करना और लोगों में एकता को बढ़ावा देना है। भागवत ने सभी की आस्था का सम्मान करने पर जोर दिया और दोहराया कि सभी भारतीयों का डीएनए एक समान है और उनके पूर्वज एक ही थे।

उन्होंने कहा, विविधता होने के बावजूद हम सभी एक जैसे हैं। हमारे पूर्वज एक ही थे। हर भारतीय जो 40 हजार साल पुराने 'अखंड भारत' का हिस्सा हैं, सभी का डीएनए एक है। हमारे पूर्वजों ने यही सिखाया था कि हर किसी को अपनी आस्था और पूजा पद्धति पर कायम रहना चाहिए और दूसरों की आस्था और पूजा पद्धति को बदलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। सब रास्ते एक जगह पर जाते हैं।

भागवत ने कहा कि सभी के विश्वास और संस्कारों का सम्मान करें, सबको स्वीकार करें और अपने रास्ते पर चलें। अपनी इच्छा पूरी करे, लेकिन इतना स्वार्थी मत बनें कि दूसरों की भलाई का ध्यान न रहे। सरसंघचालक ने कहा, हमारी संस्कृति हमें जोड़ती है। हम आपस में कितना भी लड़ लें, संकट के समय हम एक हो जाते हैं। जब देश पर किसी तरह की मुसीबत आती है तो हम साथ मिलकर लड़ते हैं। कोरोना महामारी के दौरान इससे निपटने के लिए पूरा देश एक होकर खड़ा हो गया। उन्होंने कहा कि संघ का उद्देश्य लोकप्रियता हासिल करना और अपना प्रभाव बनाना नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सत्य के मार्ग पर चलते हुए लोगों को जोड़ना और समाज को प्रभावशाली बनाना है।

भागवत ने कहा कि संघ जैसा आज कोई दूसरा नहीं है, संघ को जानना है तो किसी बात से तुलना करके नहीं जान सकते हैं। उन्होंने कहा कि संघ का काम समझना है, तो तुलना करके इसे नहीं समझ सकते हैं, गलतफहमी होने की संभावना होती है। संघ के बारे में पढ़ लिखकर अनुमान भी नहीं लगा सकते हैं। उन्होंने कहा कि संघ को समझना है तो संघ में आना चाहिए, इससे आप संघ को भीतर से देख सकते हैं, खुद के अनुभव से संघ समझ में आता है।

भागवत ने कहा कि स्वार्थ के समाज टूट जाता है

मंगलवार को बौद्धिक कार्यक्रम में सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि स्वार्थ के समाज टूट जाता है इसलिए हमारे समाज को सत्य के आधार पर प्रभावी बनाना है। उन्होंने कहा कि भारत के स्वार्थ से हमारा स्वार्थ बहुत छोटा है। बहार बैठ कर हम इससे नहीं जुड़ सकते, इसलिए अगर आप राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को जानना चाहते हैं तो इससे जुड़िये। संघ में जुड़ने के लिए जात-पात नहीं पूछी जाती न कोई फार्म भरना पड़ता है। संघ से जुड़कर सब स्वयंसेवक बन जाते हैं। उन्होंने कहा कि अंबिकापुर में दूसरी बार संघ का पदाधिकारी आया है इसलिए सेवकों और समाज में उत्साह है। लोगों ने सोचा होगा कि हम क्यों आ रहे हैं और क्या कहने वाले हैं? इसलिए उन्होंने संघ की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हमें दूसरे धर्म का भी सामान आदर करना चाहिए।

अपने धर्म के साथ दूसरे का भी सम्मान करें, सबमें ईश्वर

भागवत ने कहा, हम घर पर किसी भी देवी-देवता की पूजा करतें हों, किसी भी धर्म के हों, लेकिन देश के लिए हम एकजुट हो जाते हैं। हमें अपने धर्म के साथ दूसरे के धर्म का उतना ही आदर करना चाहिए। मातृभूमि ही सर्वोपरि है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि हिंदू संप्रदाय नहीं है, जीवन पद्धति है। उन्होंने कहा, सभी धर्मों का यही उपदेश है कि सब में ईश्वर है। प्रेम से रहो, सेवा करो। मनुष्य अलग-अलग होता है, अलग सोचता है, लेकिन सबमें ईश्वर है।

बच्चों को अच्छे संस्कार दें

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि हमारी आदतों को ठीक करने की जरूरत है। शाखा में आकर कुछ समय दें। कोई काम चुनें और देश के लिए काम करें। देश की सेवा के लिए समय लगाएं। उन्होंने कहा कि बच्चों को अच्छे संस्कार दें। बच्चों में दान देने की आदत डालें। यदि आप दान करते हैं तो बच्चों के हाथ से दिलवाएं, ताकि बच्चे इसे कायम रख सकें। हमें हमारी संस्कृति को जीना है।

चार जिलों के 10 हजार से अधिक स्वयं सेवक जुटे

संघ प्रमुख मोहन भागवत के अंबिकापुर प्रवास के अवसर पर संभाग मुख्यालय में चार जिलों के 10 हजार से अधिक स्वयं सेवक जुटे। सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, कोरिया व जशपुर जिले से बड़ी संख्या में संघ के स्वयं सेवक अंबिकापुर पहुंचे थे। पूर्ण गणवेश में पहुंचे स्वयं सेवकों ने पथ संचालन किया और पीजी कॉलेज मैदान पहुंचे। पथ संचलन में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव, छत्तीसगढ़ विधानसभा नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल, केंद्रीय मंत्री श्रीमती रेणुका सिंह, पूर्व मंत्री व विधायक बृजमोहन अग्रवाल सहित अन्य नेतागण भी शामिल हुए।

आदिवासी समाज के चक्काजाम ने बदला पथ संचलन का मार्ग

छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज ने अपनी 3 मांगों को लेकर शहर के गांधी चौक पर चक्काजाम करते हुए प्रदर्शन किया। इस दौरान आरएसएस के पथ संचलन का मार्ग परिवर्तित करना पड़ा। सर्व आदिवासी समाज ने गांधी चौक पर चक्काजाम किया था। वहीं पथ संचलन को विभिन्न मार्गों से गांधी चौक होते हुए पीजी कॉलेज मैदान में पहुंचना था।

जनजातीय धर्म संपूर्ण भारत का गौरव : डॉ. मोहन भागवत

जनजातीय गौरव हमारे गौरव का मूल है। जनजाति जीवन पद्धति हमारे जीवन पद्धति का मूल है। जनजाति रीति-रिवाज हमारे अनेक रीति-रिवाजों का मूल है। भारतवर्ष मूल कृषि और वनों में है, वहां से उभरी हुई संस्कृति है। उस संस्कृति की दुनिया को आवश्यकता है। जनजातीय धर्म संपूर्ण भारत का गौरव है। छत्तीसगढ़ के जशपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने उक्त बातें कहीं।  मोहन भागवत ने कहा कि आप जिस प्रकार सत्य के पीछे चलते हैं जनजाति समाज के प्रसिद्ध दी है जनजाति समाज में झूठा प्रामाणिकता नहीं होती। आज भी ग्रामीण इलाके के जंगलों में कोई रास्ता भटक जाए तो जब तक उसे जंगल में मनुष्य, गांव मिलेंगे तो भूखा प्यासा नहीं रहेगा। यह करुणा कहां से आई, किसने दी, इसी जनजाति समाज ने दी। हमारा धर्म सब में पवित्रता देखता है क्योंकि स्वयं का अंतःकरण पवित्र है। नदी नाले पक्षी सबने पवित्रता देखता है, इसलिए वह पर्यावरण का मित्र है। पर्यावरण का विकास करता है। अपनी उन्नति के लिए पर्यावरण को खराब नहीं करता। पर्यावरण में देवी -देवता मानना जनजाति बंधु ने ही सिखाया। जन जाति धर्म संपूर्ण भारत का गौरव है। उन्होंने आह्वान किया कि जनजाति समाज की सुरक्षा गौरव की वृद्धि के लिए उनके साथ खड़ा होना चाहिए ,जैसे दिलीप सिंह जूदेव खड़े रहते थे ।उनके जीवन से यह संदेश लेना है । एक बार इस गौरव को समझ गए तो सब कुछ ठीक हो जाएगा ।हमारे पास यह गौरव है ।उसकी सारी दुनिया को जरूरत है। भारतवर्ष को इस गौरव को धारण कर खड़ा होना है ।हम अपने संस्कारों को रीति-रिवाजों ,देवी देवता, पूर्वज उनके पराक्रम को ना भूले । भूल जाएंगे तो बड़े-बड़े पराक्रमी निठल्ले हो जाते हैं।

संगठन ही सभी समस्याओं का निदानः भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने संघ के प्रवासी कार्यकर्ताओं के तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि संगठन ही सभी समस्याओं का निदान है। कार्यकर्ता पूरी लगन एवं ईमानदारी के साथ संगठन हित में काम करें। हमें मिलकर समाज को आगे बढ़ाना है। लोहरदगा के वनवासी कल्याण केंद्र में आयोजित प्रशिक्षण शिविर का रविवार को अंतिम दिन था। कार्यकर्ताओं से रूबरू डॉ. भागवत ने कहा कि सुदूरवर्ती इलाके में रहने वाले लोगों का जीवन स्तर कैसे उंचा उठे, हमें इस पर भी चिंतन करने की जरूरत है। करीब चार घंटे के लोहरदगा प्रवास पर पहुंचे डॉ. भागवत ने प्रशिक्षण लेने वाले सभी कार्यकर्ताओं की बातों को ध्यान से सुना, उनका परिचय भी जाना। प्रशिक्षण वर्ग में लोहरदगा, जमशेदपुर, सिमडेगा, गुमला और पलामू के करीब 150 कार्यकर्ता शामिल थे