झांसी: महाराज अग्रसेन स.वि.मं.इं.कॉ. शिवपुरी मार्ग में मनाया गया गुरुतेग बहादुर जी का शहीदी दिवस

झांसी: महाराज अग्रसेन स.वि.मं.इं.कॉ. शिवपुरी मार्ग में मनाया गया गुरुतेग बहादुर जी का शहीदी दिवस
झांसी: महाराज अग्रसेन स.वि.मं.इं.कॉ. शिवपुरी मार्ग में मनाया गया गुरुतेग बहादुर जी का शहीदी दिवस

झांसी। महाराज अग्रसेन सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज शिवपुरी मार्ग में गुरुतेग बहादुर जी का शहीदी दिवस मनाया गया। विद्यालय के आचार्य गुरमीत सिंह जी ने गुरु तेग बहादुर जी के शहीदी दिवस पर भैया बहनों को बताया कि गुरु तेग बहादुर जी सिखों के नौवें गुरु थे। विश्व इतिहास में धर्म एवं मानवीय मूल्यों, आदर्शों एवं सिद्धान्त की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वालों में गुरु तेग बहादुर साहब का स्थान आदित्य है। उन्होने काश्मीरी पंडितों तथा अन्य हिन्दुओं को बलपूर्वक मुसलमान बनाने का विरोध किया। 1675 में मुगल शासक औरंगज़ेब ने उन्हे इस्लाम स्वीकार करने को कहा। पर गुरु साहब ने कहा कि सीस कटा सकते हैं, केश नहीं। इस पर औरंगजेब ने सबके सामने उनका सिर कटवा दिया। 

गुरुद्वारा शीश गंज साहिब तथा गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब उन स्थानों का स्मरण दिलाते हैं, जहाँ गुरुजी की हत्या की गयी तथा जहाँ उनका अन्तिम संस्कार किया गया। गुरुजी का बलिदान न केवल धर्म पालन के लिए नहीं अपितु समस्त मानवीय सांस्कृतिक विरासत की खातिर बलिदान था। धर्म उनके लिए सांस्कृतिक मूल्यों और जीवन विधान का नाम था। इसलिए धर्म के सत्य शाश्वत मूल्यों के लिए उनका बलि चढ़ जाना वस्तुतः सांस्कृतिक विरासत और इच्छित जीवन विधान के पक्ष में एक परम साहसिक अभियान था। आततायी शासक की धर्म विरोधी और वैचारिक स्वतन्त्रता का दमन करने वाली नीतियों के विरुद्ध गुरु तेग बहादुरजी का बलिदान एक अभूतपूर्व ऐतिहासिक घटना थी। यह गुरुजी के निर्भय आचरण, धार्मिक अडिगता और नैतिक उदारता का उच्चतम उदाहरण था। गुरुजी मानवीय धर्म एवं वैचारिक स्वतन्त्रता के लिए अपनी महान शहादत देने वाले एक क्रान्तिकारी युग पुरुष थे। 11 नवम्बर, 1675 ई॰ (भारांग: 20 कार्तिक 1597 ) को दिल्ली के चांदनी चौक में काज़ी ने फ़तवा पढ़ा और जल्लाद जलालदीन ने तलवार करके गुरु साहिब का शीश धड़ से अलग कर दिया। किन्तु गुरु तेग़ बहादुर ने अपने मुँह से सी' तक नहीं कहा। आपके अद्वितीय बलिदान पर समस्त देश नतमस्तक है। इस अवसर पर विद्यालय के सभी आचार्य /आचार्य बहने भैया /बहन उपस्थित रहें।