राष्ट्रभक्ति, स्वाभिमान और वीरता के प्रतीक महाराणा प्रताप हमारे लिए प्रेरणा श्रोत : डॉ. राजेश सिंह जी

राष्ट्रभक्ति, स्वाभिमान और वीरता के प्रतीक महाराणा प्रताप हमारे लिए प्रेरणा श्रोत : डॉ. राजेश सिंह जी

गोरखपुर। सरस्वती शिशु मंदिर (10+2)  पक्कीबाग में वंदना सभा के दौरान मां भारती के वीर सपूत स्वाभिमान की प्रतिमूर्ति महाराणा प्रताप जी की पावन जयंती मनाई गई। इस अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विद्यालय के यशस्वी प्रधानाचार्य डॉ. राजेश सिंह जी ने कहा कि महाराणा प्रताप मेवाड़ में सिसौदिया राजपूत राजवंश के राजा थे। महाराणा प्रताप अपनी वीरता के लिए जाने जाते हैं। जिस कालखण्ड में बहुत से राजा महाराजा अकबर के समक्ष हथियार डाल चुके थे वहीं महाराणा प्रताप ने मुगल साम्राज्य के विरोध में सेना तैयार कर लड़ाई लड़ी उन्होंने कभी अकबर के वर्चस्व को स्वीकार नहीं किया। 

प्रधानाचार्य ने आगे कहा कि अकबर आक्रांता था, साम्राज्य-विस्तार के साथ-साथ संपूर्ण भारतवर्ष को इस्लामी झंडे तले लाना भी उसका अघोषित लक्ष्य था। जबकि महाराणा प्रताप अपनी मातृभूमि की स्वाधीनता, प्रजा की मान-मर्यादा एवं अस्मिता की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे थे। भारत के सबसे महान राजपूत योद्धाओं में से एक महाराणा प्रताप ने मुगल शासक अकबर के खिलाफ कई लड़ाई लड़ी। अन्य पड़ोसी राजपूत शासकों के विपरीत, महाराणा प्रताप ने बार-बार शक्तिशाली मुगलों के सामने झुकने से इनकार कर दिया और अपनी अंतिम सांस तक साहसपूर्वक मुगलों से लड़ते रहे। महाराणा प्रताप सिंह को पहला स्वतंत्रता सेनानी' माना जाता है, परिस्थितियाँ कैसी भी रही महाराणा प्रताप ने कभी अकबर के नेतृत्व वाली मुगल सेनाओं के सामने आत्मसमर्पण नहीं किया था। राष्ट्रभक्ति, स्वाभिमान, परिश्रम और वीरता के प्रतीक महाराणा प्रताप हम सभी के लिए प्रेरणा श्रोत हैं। उनका जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। इस अवसर पर विद्यालय के भैया बहन एवं समस्त आचार्य आचार्या बंधु उपस्थित रहे।