भारतीय शास्त्रीय संगीत में पंडित शिवकुमार शर्मा जी के योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता : संगीताचार्य मनोज गुप्ता

भारतीय शास्त्रीय संगीत में पंडित शिवकुमार शर्मा जी के योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता : संगीताचार्य मनोज गुप्ता

प्रयागराज l विद्या भारती से संबद्ध काशी प्रांत के रानी रेवती देवी सरस्वती विद्या निकेतन इंटर कॉलेज, राजापुर, प्रयागराज के संगीताचार्य एवं मीडिया प्रभारी मनोज गुप्ता की सूचनानुसार विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री बांके बिहारी पांडे जी ने देश के प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीतकार और संतूर  वादक पंडित शिवकुमार शर्मा जी के आसमयिक निधन पर पर विद्यालय परिवार सहित गहरा दुख व्यक्त करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की l

        संगीताचार्य मनोज गुप्ता ने बताया कि शिवकुमार शर्मा का जन्म 13 जनवरी 1938 को जम्मू में हुआ था। शिवकुमार शर्मा की माता जी श्रीमती उमा दत्त शर्मा स्वयं एक शास्त्रीय गायिका थीं जो बनारस घराने से संबंध रखती थीं। 4 वर्ष कि अल्पायु से ही शिवकुमार शर्मा ने अपने पिता से गायन व तबला वादन सीखना प्रारंभ कर दिया था। शिवकुमार शर्मा ने एक साक्षात्कार में बताया था कि उनकी माँ का यह सपना था कि वे भारतीय शास्त्रीय संगीत को संतूर पर बजाने वाले प्रथम संगीतज्ञ बनें। इस प्रकार उन्होंने 13 वर्ष की आयु में संतूर सीखना शुरू कर दिया तथा अपनी माँ का सपना पूरा किया। शिवकुमार शर्मा ने अपनी प्रथम सार्वजनिक प्रस्तुति मुंबई में वर्ष 1955 में दी। शिवकुमार शर्मा ने फासले, सिलसिला, लम्हे, चांदनी, डर आदि हिन्दी फ़िल्मों में प्रसिद्ध संगीत दिया है।

 विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में रमेश चंद्र मिश्रा ,जटाशंकर तिवारी, शिव नारायण सिंह, कामाख्या प्रसाद दुबे ,आनंद कुमार, दिनेश कुमार शुक्ला, सत्य प्रकाश पांडे प्रथम ,अवधेश कुमार, वकील प्रसाद, वाचस्पति चौबे ,सुनील कुमार ,शशी कपूर गुप्ता ,प्रेम सागर मिश्रा ,प्रभात कुमार शर्मा ,मनोज  कुमार गुप्ता ,दीपक दयाल ,रमेश चंद्र अग्रहरि,सत्य प्रकाश पांडे द्वितीय, कपिल देव सिंह  ,वंशराज यादव ,विमल चंद दुबे एवं विभु श्रीवास्तव सहित पूरा विद्यालय परिवार शामिल रहा l