श्रीरामचरितमानस की रचना करने वाले महान कवि थे संत तुलसीदास जी : बांके बिहारी पांडे

श्रीरामचरितमानस की रचना करने वाले महान कवि थे संत  तुलसीदास जी :  बांके बिहारी पांडे

प्रयागराज l विद्या भारती से संबद्ध काशी प्रांत के रानी रेवती देवी सरस्वती विद्या निकेतन इंटर कॉलेज, राजापुर, प्रयागराज के संगीताचार्य एवं मीडिया प्रभारी मनोज गुप्ता की सूचनानुसार विद्यालय के प्रधानाचार्य श्रीमान बांके बिहारी पांडे जी ने भगवान श्री रामचंद्र जी के जीवन पर आधारित काव्य श्री रामचरितमानस की रचना करने वाले भक्ति काल के महान कवि एवं संत शिरोमणि गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती पर विद्यालय परिवार सहित शत-शत नमन किया l


उन्होंने बताया कि गोस्वामी तुलसीदास का जन्म स्थान विवादित है। कुछ लोग मानते हैं की इनका जन्म सोरों शूकरक्षेत्र, वर्तमान में कासगंज (एटा) उत्तर प्रदेश में हुआ था।[3] कुछ विद्वान् इनका जन्म राजापुर जिला बाँदा (वर्तमान में चित्रकूट) में हुआ मानते हैं। जबकि कुछ विद्वान तुलसीदास का जन्म स्थान राजापुर को मानने के पक्ष में हैं।


राजापुर उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिला के अंतर्गत स्थित एक गाँव है। वहाँ आत्माराम दुबे नाम के एक प्रतिष्ठित संध्या नंददास भक्तिकाल में पुष्टिमार्गीय अष्टछाप के कवि नंददास जी का जन्म जनपद- कासगंज के सोरों शूकरक्षेत्र अन्तर्वेदी रामपुर (वर्त्तमान- श्यामपुर) गाँव निवासी भरद्वाज गोत्रीय सनाढ्य ब्राह्मण पं० सच्चिदानंद शुक्ल के पुत्र पं० जीवाराम शुक्ल की पत्नी चंपा के गर्भ से सम्वत्- 1572 विक्रमी में हुआ था। पं० सच्चिदानंद के दो पुत्र थे, पं० आत्माराम शुक्ल और पं० जीवाराम शुक्ल। पं० आत्माराम शुक्ल एवं हुलसी के पुत्र का नाम महाकवि गोस्वामी तुलसीदास था, जिन्होंने श्रीरामचरितमानस महाग्रंथ की रचना की थी। नंददास जी के छोटे भाई का नाम चँदहास था।

नंददास जी, तुलसीदास जी के सगे चचेरे भाई थे। नंददास जी के पुत्र का नाम कृष्णदास था। नंददास ने कई रचनाएँ- रसमंजरी, अनेकार्थमंजरी, भागवत्-दशम स्कंध, श्याम सगाई, गोवर्द्धन लीला, सुदामा चरित, विरहमंजरी, रूप मंजरी, रुक्मिणी मंगल, रासपंचाध्यायी, भँवर गीत, सिद्धांत पंचाध्यायी, नंददास पदावली हैं। ब्राह्मण रहते थे। उनकी धर्मपत्नी का नाम हुलसी था। संवत्1511के श्रावण मास के शुक्लपक्ष की सप्तमी तिथि के दिन अभुक्त मूल नक्षत्र में इन्हीं दम्पति के यहाँ तुलसीदास का जन्म हुआ। प्रचलित जनश्रुति के अनुसार शिशु बारह महीने तक माँ के गर्भ में रहने के कारण अत्यधिक हृष्ट पुष्ट था और उसके मुख में दाँत दिखायी दे रहे थे।

जन्म लेने के साथ ही उसने राम नाम का उच्चारण किया जिससे उसका नाम रामबोला पड़ गया। उनके जन्म के दूसरे ही दिन माँ का निधन हो गया। पिता ने किसी और अनिष्ट से बचने के लिये बालक को चुनियाँ नाम की एक दासी को सौंप दिया और स्वयं विरक्त हो गये। जब रामबोला साढे पाँच वर्ष का हुआ तो चुनियाँ भी नहीं रही। वह गली-गली भटकता हुआ अनाथों की तरह जीवन जीने को विवश हो गया l


        शत शत नमन करने वालों में रमेश चंद्र मिश्रा, जटाशंकर तिवारी, शिव नाराsयण सिंह, कामाख्या प्रसाद दुबे, आनंद कुमार, दिनेश कुमार शुक्ला, सत्य प्रकाश पांडे प्रथम, अवधेश कुमार, वकील प्रसाद, वाचस्पति चौबे, सुनील कुमार, शशी कपूर गुप्ता, प्रेम सागर मिश्रा, प्रभात कुमार शर्मा, मनोज  कुमार गुप्ता, दीपक दयाल, रमेश चंद्र अग्रहरि, सत्य प्रकाश पांडे द्वितीय, कपिल देव सिंह, वंशराज यादव, विमल चंद दुबे एवं विभु श्रीवास्तव सहित पूरा विद्यालय परिवार शामिल रहा।