आचार्यों में सरसता, सरलता व सहजता का गुण होना चाहिए : राज बिहारी विश्वकर्मा

आचार्यों में सरसता, सरलता व सहजता का गुण होना चाहिए : राज बिहारी विश्वकर्मा

गोरखपुर। "शिशु परमात्मा का रूप है जिससे हम सभी आचार्य अपने ज्ञान से अभि संचित करते हैं, हम आचार्यों में सरसता सरलता सहजता आदि गुण होने चाहिए। हमारी वाणी हमारा पहनावा हमारा व्यवहार हमारी पहचान होते हैं। "यह बातें संकुल प्रमुख प्रधानाचार्य श्री राज बिहारी विश्वकर्मा जी  (सरस्वती शिशु मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सुभाष चंद्र बोस नगर सूरजकुंड,) ने विवेकानंद सरस्वती शिशु मंदिर सैनिक विहार नंदा नगर में शैक्षणिक सत्र लेते हुए कहीं। 

इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विद्यालय के प्रबंधक श्री सुभाष राय जी ने कहा कि "शिक्षा चरितार्थ करना है हमें चरैवेति चरैवेति के सिद्धांत को अपनाकर अपने कार्य को निरंतर करते रहना है।" विद्यालय की प्रधानाचार्य श्रीमती रंजना त्रिपाठी द्वारा गणमान्य अतिथियों का परिचय करवाया गया। कार्यक्रम में आचार्यों की शैक्षणिक गतिविधि के बारे में जानकारी ली गई तथा उसको किस तरह से सरलता से कक्षाओं में क्रियान्वयन हो इस इस विषय पर चर्चा की गई,जिसमें सभी आचार्य एवं आचार्य बहनों ने भाग लिया। सत्र बहुत ही रोचक और महत्वपूर्ण रहा, संकुल प्रमुख के द्वारा आचार्यों का उत्साहवर्धन तथा उनके कार्य की सराहना भी की गई। प्रश्नोत्तर सत्र में सभी आचार्य बहनों ने पूरे सुरुचिपूर्ण तरीके से प्रश्नों के उत्तर दिए।