हमारे समर्पण और परिश्रम से ही भारत पुन: विश्वगुरु बनेगा: मा. सुनील आम्बेकर

हमारे समर्पण और परिश्रम से ही भारत पुन: विश्वगुरु बनेगा: मा. सुनील आम्बेकर
हमारे समर्पण और परिश्रम से ही भारत पुन: विश्वगुरु बनेगा: मा. सुनील आम्बेकर
  • राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत युवा पीढ़ी का निर्माण कर रही विद्या भारती : मा. सुनील आम्बेकर
  • देश में राजनीतिक हितों के लिए चल रहे षड्यंत्रों से बचने की जरूरत :  श्री नवनीत सहगल
  • अग्निपथ योजना युवाओं के लिए लाभकारी, विरोध अतार्किक :  श्री नवनीत सहगल
  • इतिहास के सही पक्षों को समाज के सामने लाने की जरूरत :  श्री आशुतोष शुक्ला
  • हमें समाज को मीडिया साक्षर बनाने की जरूरत :  श्री संजय द्विवेदी

लखनऊ। देश की सेवा, सुरक्षा के लिए जब जक सामान्य लोग आगे नहीं आएंगे, तब तक देश खड़ा नहीं हो सकता है। इसी विचार को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ स्थापना काल से ही कार्य कर रहा है और सामान्य लोगों को जागरूक कर रहा है। हम सभी को राष्ट्रहित में समर्पण और परिश्रम करना होगा, जिससे हमारा देश पुन: विश्वगुरु बन सके। उक्त उद्गार मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख मा. सुनील आम्बेकर जी ने विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रचार विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय क्षेत्रीय प्रशिक्षण बैठक (25-26 जून, 2022) के तृतीय सत्र में व्यक्त किए। प्रशिक्षण बैठक में विद्या भारती की संरचना के अनुसार, पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के चारों प्रांत - अवध, कानपुर, काशी और गोरक्ष से करीब 80 आचार्य बंधु/भगिनी शामिल हुए।


राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख मा. सुनील आम्बेकर जी ने विद्या भारती के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन किया और कहा कि हमें संयमित और मर्यादा में रहकर ठीक से योजना बनाकर कार्य करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हमारा राष्ट्र पुरातन है, हमारा राष्ट्र सनातन है और देश का इतिहास गौरवशाली है। हमें अतीत से सीखकर आगे बढ़ने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि विमर्श एक सतत् प्रक्रिया है, हमारा कार्य इसे आगे बढ़ाना है। इसके साथ ही राष्ट्रहित में समाज के विमर्श को आगे बढ़ाना है।  समाज के प्रत्येक व्यक्ति में शिक्षा के साथ-साथ संस्कार होना जरूरी है। विद्या भारती जैसी शैक्षणिक संस्थाएं संस्कारवान शिक्षा के  साथ राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत, देश के लिए मर मिटने वाली युवा पीढ़ी का निर्माण कर रही है। उन्होंने कहा कि हमें मीडिया के माध्यम से अपने अच्छे कार्यों को समाज तक पहुंचाना है और ये कार्य तभी सफल होगा, जब यह समाज में परम्परा बन जाए।


अपर मुख्य सचिव सूचना श्री नवनीत सहगल जी ने कहा कि ज्ञानवान व्यक्ति ही शक्तिशाली और ताकतवर होता है, इसलिए हमें समसामयिक विषयों की जानकारी होना बेहद जरूरी है। उन्होंने अग्निपथ योजना का जिक्र करते हुए कहा कि जानकारी के अभाव में ही विरोध हो रहा है, जबकि ये योजना युवाओं के लाभकारी साबित होने वाली है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक हितों को साधने के लिए देश में चल रहे षड़यंत्रों से बचने के लिए हमें तथ्यात्मक और सही जानकारी लोगों तक पहुंचानी होगी, इसके लिए राष्ट्रहित में काम करने वाली संस्थाओं को आगे आना होगा।


भारतीय जनसंचार संस्थान के महानिदेशक श्री संजय द्विवेदी जी ने कहा कि आज के आधुनिक युग में हमें दुनिया से कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ना है और हमें अपनी संस्कृति और परम्परा को भी सुरक्षित व संरक्षित रखना है, ऐसे में विद्या भारती जैसे बड़े संगठन की भूमिका और बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिवेश में शिक्षकों की ज़िम्मेदारी है कि वह बच्चों को उचित संदेश के साथ-साथ उनसे बेहतर संवाद करें, जिससे हमारे समाज को सही दिशा मिल सके। उन्होंने कहा कि समाज में भय, भ्रम और द्वेष फैलाने वाले अराजकतत्वों से खुद को और समाज को बचाने की जरूरत है। इसके साथ ही हमें समाज को मीडिया साक्षर बनाने की जरूरत है।


नवभारत टाइम्स के संपादक श्री नदीम जी ने प्रिंट मीडिया की कार्य पद्धति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि हम जिस भी संस्थान से जुड़े हैं, उसके प्रति समर्पण की भावना होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सूचना के लिए आपके सम्पर्क अच्छे होने के साथ परस्पर संवाद होना चाहिए। हमें बोलने से अधिक सुनने पर फोकस करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पाठकों को आकर्षिक करने के लिए न्यूज की हेडिंग को प्रभावशाली बनाना चाहिए। सोशल मीडिया पर अपनी खबरों की वैल्यू बढ़ाने के लिए तथ्यों की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर कोई भी सूचना तथ्यों की पुष्टि के बिना शेयर या फारवर्ड नहीं करना चाहिए।


दैनिक जागरण के संपादक श्री आशुतोष शुक्ला जी ने कहा कि ये सभ्यताओं के संघर्ष का दौर है। हम भारतीय दृष्टि से अपनी बात तर्क के साथ रखें और इतिहास के सही पक्षों को समाज के सामने लाएं, जिसका समाज सकारात्मक प्रभाव दिखाई देगा। उन्होंने कहा कि वनवासी, सुदूरवर्ती और दक्षिण भारत में आरएसएस अद्भुत कार्य कर रहा है, जिसे समाज में पहुंचाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इतिहास को सिर्फ पढ़ लेने या उसका विरोध करके बदलाव नहीं लाया जा सकता, हमें वैचारिक और तकनीकी रूप से मजबूत होना होगा और तर्कपूर्ण बातें सामने रखनी होंगी।


कार्यक्रम के समापन सत्र में विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय संगठन मंत्री मा. हेमचन्द्र जी ने प्रचार विभाग की कार्य योजना के लिए बनाए गए अष्ट विन्दुओं पर बिन्दुवार चर्चा की। उन्होंने चारों प्रांतों के 49 जिलों से आए हुए प्रांत प्रचार प्रमुख, सोशल मीडिया प्रमुख और संवाददाओं से आगामी योजना की जानकारी ली और उनका मार्गदर्शन किया।
वरिष्ठ पत्रकार श्री अजय कुमार ने समाचार का विश्लेषण, गुणवत्ता और संग्रहण सहित अन्य बातों पर विस्तृत चर्चा की।

बैठक में उत्तर प्रदेश के सूचना निदेशक श्री शिशिर जी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रचार प्रमुख श्री नरेंद्र सिंह, एससीईआरटी के संयोजक डॉ. सौरभ मालवीय, दूरदर्शन के कार्यक्रम अधिकारी श्री आत्म प्रकाश, सोशल मीडिया विशेषज्ञ वरिष्ठ पत्रकार श्री प्रणय विक्रम सिंह जी,  राष्ट्रीय स्वरूप के संपादक श्री सत्यप्रकाश त्रिपाठी जी, अनिरुद्ध शर्मा सहित कई वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे।


प्रशिक्षण बैठक की सम्पूर्ण कार्ययोजना विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रचार प्रमुख श्री सौरभ मिश्रा जी ने रखी और प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन सह प्रचार प्रमुख श्री भास्कर दूबे जी किया। कार्यक्रम में आए अतिथियों का परिचय श्री बालिका शिक्षा प्रमुख श्री उमाशंकर जी, प्रशिक्षण प्रमुख श्री दिनेश जी ने कराया। इस अवसर विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के चारों प्रांतों के आचार्य/आचार्या बंधु/भगिनी, पदाधिकारी, समाज के संभ्रांत व्यक्तियों सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।